इस सबसे दुखी प्रधानमंत्री नेहरू ने गृह मंत्री सरदार पटेल को लखनऊ भेजा और मुख्यमंत्री पंत को कई पत्र लिखे. ज़रूरत पड़ने पर उन्होंने खुद भी अयोध्या जाने की बात कही. उस समय देश विभाजन के बाद के दंगों, मारकाट और आबादी की अदला-बदली से उबर ही रहा था और पाकिस्तान के हमले से कश्मीर के हालात भी नाज़ुक थे. पंत को लिखे पत्र में नेहरू ने चिंता प्रकट की कि अयोध्या में मस्जिद पर क़ब्ज़े की घटना का पूरे देश, विशेषकर कश्मीर पर बुरा असर पड़ेगा, जहाँ की बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी ने भारत के साथ रहने का फ़ैसला किया था. क़रीब-क़रीब लाचार नेहरू ने कहा कि गृह राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में उनकी बात नहीं सुनी जा रही और स्थानीय कांग्रेस नेता सांप्रदायिक होते जा रहे हैं. फ़ैज़ाबाद में कांग्रेस के महामंत्री अक्षय ब्रह्मचारी इस घटना के विरोध में लंबे समय तक अनशन पर रहे और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री लालबहादुर शास्त्री को ज्ञापन दिया. विधानसभा में भी मुद्दा उठा लेकिन सरकार ने एक लाइन का संक्षिप्त जवाब दिया कि मामला न्यायालय में है इसलिए ज़्यादा कुछ कहना उचित नहीं. सिविल मुक़दमे 16 जनवरी 1950 को गोपाल ...
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