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इ हमर नव वर्ष नै

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नै चाही शुभ कामना नै हमर ई कामना नै हमर ई नव वर्ष छी नै हमर ई धर्म विशेष छी धरती आकाश  भरल कुहेस सं लोक बाग सब पड़ल जाड़  सं चिड़ै चुनमुनी नै चहचहा रहल य ध्यान सब नै किलोल कय रहल य सुर्य देव नै दर्शन देखा रहल य दिन राईत ऐक्के जेना भ रहल य किछु रंग नै किछु उमंग नै ई नव वर्ष केर कोनो ढंग नै नव वर्ष केर ई कोनो रंग नै किछु मास और इंतज़ार करु अपन मन म कनियो त विचार करु कियक नक़ल म अपन अक्ल बहाबी ई धुंध कुहासा हटय  दियौ कुहासा केर सम्राज्य हटय दियौ प्रकृति केर अपन रूप खिलय दियौ फागुन केर रंग बिखरय दियौ प्रकृति दुल्हन केर रूप धय जखन स्नेह – सुधा बरसायत शस्य – श्यामला धरती माता घर -घर खुशहाली आयत तखन चैत्र शुक्ल केर प्रथम तिथि क तखन नव वर्ष  सब मिल मनायब  आर्यावर्त केर पुण्य भूमि पर सब मिल जय गान करब युक्ति – प्रमाण सॅ स्वयंसिद्ध अपन नव वर्ष क करब प्रसिद्ध आर्वर्तय केर कीर्ति सदा  नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अनमोल विरासत सॅ भरल अपन सब प्राणी म उमंग भरल अपन करैत सब स सरोज ई वंदना सब गोटे क देब शुभ कामना सब गोटे करब कामना #हम_सब_मिथिलावासी

जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी

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जेएनयू की एडमिशन पॉलिसी जैसी है वैसी नहीं होती तो मुझ जैसे लोअर मिडिल क्लास परिवार के छात्र का झारखंड के जादूगोड़ा से दिल्ली पहुंचना आसान नहीं होता. एडमिशन मिल भी जाता तो मैं शायद पढ़ाई का ख़र्च नहीं उठा पाता, अगर जेएनयू जैसी व्यवस्था नहीं होती. मोदी राज में कितना बदल गया है जेएनयू पहले तो कुछ फैक्ट्स हो जाएं, फिर मूल्यों की बात हो. 1. जेएनयू की स्थापना संसद के एक एक्ट से हुई थी. विज्ञापन 2. सिर्फ़ जेएनयू में ही एडमिशन की ऐसी पॉलिसी रही है जिसमें पिछड़े ज़िलों से आने वालों को इसके लिए अतिरिक्त नंबर दिए जाते हैं. मसलन, आप उड़ीसा के कालाहांडी ज़िले से हैं तो आपको पांच नंबर मिलेंगे क्योंकि वो इलाक़ा पिछड़ा है. 3. जेएनयू में ये कोशिश की जाती है कि भारत के सभी राज्यों से छात्र पढ़ने आ सकें हालांकि बिहार और उड़ीसा जैसे पिछड़े राज्यों के छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक होती है. 4. जेएनयू संभवत पूरे भारत में सोशल साइंस के मल्टी डिसीप्लिनरी रिसर्च का एकमात्र संस्थान है. 5. यूनिवर्सिटी में अनेक विदेशी भाषाएं पढ़ाई जाती हैं, अंडर ग्रैजुएट कोर्स सिर्फ़ विदेशी भाषाओं में होते हैं, बाक़ी सारे कोर्स मा...

दरभंगा हाउस, 7,मान सिंह रोड , दिल्ली.

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न . दिल्ली के लूटियन जोन मे 1928 मे निर्मित इस सुन्दर भवन की खूबसुरती पर तब ग्रहण लग  गये  जब 1962 मे महाराजा  डा . कामेशवर  सिंह , सांसद  के आसमायिक निधन के बाद इसका केन्द्रिय सरकार  द्वारा  अधिग्रहण   कर लिया गया | कुछ वर्ष  अमेरिकन किरायेदार  के रहने के बाद IB का  मुख्यालय बनाया  गया और बाहरी  व्यक्ति के प्रवेश और तस्विर  लेने पर प्रतिबंध  लग गया . अब तो बस मानसिंह रोड से अकबर रोड को जोड़ने वाली स्ट्रीट रोड दरभंगा लेन की बोर्ड हीं दरभंगा की याद दिलाती है .  इस भवन की दूर्दशा   की  ओर  ध्यान आकृष्ट  कराते हूए  उसकी उचित  रखरखाव  हेतु  Nehchal Sandhu  , IPS and Ex Director of Intelligence  Bureau and Deputy National Security Advisior to PMO लिखते हैं : “ The arcaded verandahs had been crudely bricked up. And inside, many of the commodious rooms had been partitioned into cubby holes. The few elegantly wood-panelled rooms with...

मिथिला केर सामा

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सामा पूजा  रविदिन २९ नवम्बर २०२० क होयत। सामा चकेवा - काँच माटिक बनल मानव , पशु आ पक्षीक आकृति अगर काँच रहेत अछि तऽ सामा कहबैत अछि आ ओकरे अगर आबामे पका देल जाए तऽ चकेबा कहबैत अछि । ई पूजा कार्तिक शुक्ल द्वितीयासँ आरम्भ कए पूर्णिमा का समाप्त कएल जाइत अछि । ई सामा जाम्बवती आ कृष्णक कन्या थिकीह । शकुन्त पक्षीके रुपमे हिनक पूजा भाइक कल्याण कामनासँ महिला लोकनि करैत छथि । नव धानक शीशसँ हिनक पूजा साँझमे गीत गाबि कएल जाइत अछि । भ्रातृद्वितिया दिनसँ ई पूजा आरम्भ होइत अछि आ पूर्णिमा दिन चूड़ा - दही , गूड भोग लगा परिचारिका वर्गमे प्रसाद बाँटल जाइछ । वाटो बहिनो चौबटिया पर राखल जाइत छथि । सामाक अदला - बदली मैथिलीएमे मन्त्र पढ़ि - पढि कएल जाइत अछि । ई सब कार्य महिला लोकनि करैत छथि । रातिमे अरोस - परोसक महिला लोकनि एकत्र भय गीतनाद करैत आङनक बाहर बाड़ी आ कि चौमासाके चुगिला आ वृन्दावन जड़ाए एहि पूजाक समापन करैत छथि । भाइस सामा फोरेबाक आ जलपान देबाक विधान अछि । जहिया रातिमे पूर्णिमा पड़ेत छैक तहिये होइत अछि । ई पूजा सामा द्वारा अपन भाए साम्बकक कल्याणार्थ आरम्भ भेल । सामा गीतः...

बालदिवस की शुभकामना

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वाल दिवस  मुझे नहीं पता कि नेहरू को बच्‍चों से प्‍यार प्रधानमंत्री बनने से पहले हुआ या बाद में, लेकिन दरभंगा के महाराजा कामेश्‍वर सिंह की यात्रा पुस्तिका से पता चलता है कि उनकी हर यात्रा में बच्‍चों के लिए जगह आरक्षित होता था और बिना बच्‍चे वो यात्रा शायद ही करते थे। बच्‍चों का चयन छोटी-मोटी प्रतियोगिता के माध्‍यम से होता था। इन प्रतियोगिताओं में सामान्‍य ज्ञान और श्‍लोक से संबंधित सवाल किये जाते थे।  बच्‍चोें के प्रति स्‍नेह तो पहले से था, लेकिन अपनी गर्भवती पत्‍नी की मौत के बाद बच्‍चों के प्रति उनका स्‍नेह और बढ गया। जो बच्‍चे दुनिया नहीं देख पाते उनके लिए उन्‍होंने दरभंगा में कामेश्‍वरी प्रिया पुअर होम नामक एक अस्‍पताल और शिक्षालय खोला जहां ऐसे बच्‍चों का नि:शुल्‍क रहना, पढना और इलाज की व्‍यवस्‍था की गयी। इतना ही नहीं जब भी वो दरभंगा से बाहर जाते थे तो कोई ना कोई उपहार उन बच्‍चों के लिए और अपने उस बच्‍चे के लिए जरुर लाते थे जो इस दुनिया को नहीं देख सका। एक उपहार माधवेश्‍वर शमशान में रखने कामेश्‍वर सिंह खुद जाते थे। कहा जाता है कि युवराज जीवेश्‍वर सिंह में उनकी ज...

दास्तां बिहार के जुट मिल की

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दरभंगा - समस्तीपुर रेलखंड पर समस्तीपुर से दो किमी  पहले मुक्तापुर में 84 एकड़ रकबा में स्थित रमेश्वर जूट मिल की स्थापना 1926 में हुई थी। 1954 तक दरभंगा महाराज ने इसे चलाया। इसके बाद 76 तक मेसर्स बिरला ब्रदर्स ने चलाया। 1976 में एमपी बिरला ने इसका अधिग्रहण कर लिया। 1986 से मिल का स्वामित्व ¨वसम इंडिया के पास है। 125 करोड़ के सालाना कारोबार वाली उत्तर भारत की एकमात्र जूट मिल बिहार के लिए गौरव थी। बंद होने से पहले तक इस जूट मिल में 300 लूम चल रहे थे। इसकी अधिकृत पूंजी ५० लाख थी और प्रदत्त पूंजी करीब २६ लाख उस ज़माने में थी . इसी तरह कृषि पर आधारित एक और उद्योग इस रेल खंड के थलवाड़ा और हायाघाट के बीच रमेश्वरनगर में  ३००+एकड़ में अशोक पेपर मिल लिमिटेड  १९५६ में स्थापित हुई जिसे बाद में संयुक्त उपक्रम  के अधीन चलाया गया .बिहार सरकार ,असम सरकार और IDBI द्वारा . आज मात्र इसकी जमीन का अनुमानित  बाजार मूल्य १००० करोड़  है. इस मिल में अल्लिमाण्ड फ्रांस  की मशीन लगायी गयी थी .   थलवाड़ा स्टेशन से रमेश्वर नगर तक नैरो गेज रेल लाइन बिछी थी . ये सभी कृष...

हाले बयाँ मिथिला के चिनी मिलौ का

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बिहार चीनी के उत्पादन के लिए जाना जाता था. देश के कुल चीनी उत्पादन का 40 फ़ीसदी हिस्सा बिहार में होता था. देश की आज़ादी से पहले बिहार में 33 चीनी मिलें हुआ करती थीं लेकिन आज 28 चीनी मिलें हैं इनमें से भी सिर्फ़ 11 मिलें ऐसी हैं जो इस वक्त चालू हालत में हैं. और इनमें से भी 10 मिलों का मालिकाना हक़ प्राइवेट कंपनियों के पास है. साल 1933 से लेकर 1940 तक बिहार में चीनी मिलों की संख्या बढ़ती गई और उत्पादन भी ख़ूब बढ़ा लेकिन इसके बाद चीनी मिलों की हालत बिगड़ने लगी. इसके बाद साल 1977 से लेकर 1985 तक बिहार सरकार ने इन चीनी मिलों का अधिग्रहण शुरू किया. इस दौरान दरभंगा की सकरी चीनी मिल, रयाम मिल, लोहट मिल, पुर्णिया की बनमनखी चीनी मिल, पूर्वी चंपारण और समस्तीपुर की मिलें सरकार के पास आ गईं. साल 1997-98 के दौर में ये मिलें संभाली नहीं जा सकीं और एक के बाद एक मिलें बंद होने लगीं. दरभंगा की सकरी मिल बिहार में बंद होने वाली सबसे पहली चीनी मिल मानी जाती है. साल 1977 में जब राज्य की कर्पूरी ठाकुर सरकार ने इस मिल का अधिग्रहण किया था तो लोगों में उम्मीद जगी कि सबकुछ ठीक हो जाएगा. इ...

#अशोक_पेपरमील_दरभंगा का इतिहास और वर्तमान

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अशोक पेपर मिल की शुरुआत 1958 में दरभंगा महाराज ने की थी, इसके लिए किसानों से ज़मीन मांगी गई और बदले में उन्हें फ़ैक्ट्री लगाने के फ़ायदे बताए गए. साल 1989 में इस मिल का मालिकाना हक़ बिहार सरकार को मिला लेकिन 1990 तक बिहार सरकार ने चीज़ें अपने हाथ में नहीं लीं. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा और कोर्ट ने इंडस्ट्रियल पॉलिसी और प्रमोशन विभाग के सचिव से अशोक पेपर मिल का रिवाइवल प्लान कोर्ट में पेश करने को कहा. साल 1996 में कोर्ट में एक ड्राफ्ट पेश किया गया और मिल के निजीकरण की सिफ़ारिश हुई, जिसे कोर्ट ने सहमति दे दी. साल 1997 में आईडीबीआई बैंक मर्चेंट बैंकर बना और अशोक पेपर मिल का सौदा मुंबई की कंपनी नुवो कैपिटल एंड फ़ाइनैंस लिमिटेड के मालिक धरम गोधा को मिल गया. इसके बाद भी मिल लगभग 6 महीने ही चल सकी और नवंबर 2003 में इसका ऑपरेशन पूरी तरह से बंद हो गया. लगभग 400 एकड़ में फैली इस फ़ैक्ट्री में आज जंगल जैसी घास फैली हुई है और ये ज़हरीले सापों का डेरा बनकर रह गया है. पास के गांव में रहने वाले महावीर यादव कहते हैं, "इतने नेता आए, देखे और चले गए लेकिन कुछ ना हुआ. अब ये ...

रामविलास पासवान की राजनिति क सफर

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छात्र राजनीति में सक्रिय रामविलास पासवान, जयप्रकाश नारायण के समाजवादी आंदोलन से निकले थे. साल 1969 में पहली बार पासवान बिहार के विधानसभा चुनावों में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीवदवार के रूप निर्वाचित हुए. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का 74 वर्ष की उम्र में गुरुवार शाम निधन हो गया. वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उनके बेटे और एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने ट्विटर हैंडल पर राम विलास पासवान के निधन की पुष्टि की है. चिराग पासवान ने अपने ट्वीट में लिखा, "पापा....अब आप इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं. Miss you Papa..." राम विलास पासवान को मजाक में राष्‍ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव मौसम वैज्ञानिक बुलाते थे. इसकी वजह यह थी कि रामविलास पासवान हमेशा सत्ता के साथ रहे. उन्होंने छह प्रधानमंत्रियों के साथ कैबिनेट में काम किया था. राम विलास पासवान जो एक समय में कांग्रेस की सत्ता के खिलाफ इमरजेंसी के दौरान जेल गए थे, बाद में उसी की अगुवाई वाली यूपीए सरकार में मंत्री भी रहे. उस दौरान बीजेपी उन...

विद्यापति ऐयरपोर्ट दरभंगा का डाइरेक्टर बने बि. के . मंडल

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 जैसे-जैसे दरभंगा एयरपोर्ट से आठ नवम्बर को हवाई सेवा शुरू होने का दिन नजदीक आता जा रहा है, हर एक दिन गुजरने के साथ ही लोगों के दिलों की धड़कनें तेज होती जा रही हैं। रेलगाड़ी से हवाई सफर तक का समय तय करने में मिथिला की हृदयस्थली दरभंगा को काफी लम्बा समय लग गया है। तय समय पर उड़ान सेवा शुरू करने को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से भी तैयारी शुरू कर दी गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्वी क्षेत्र के रीजनल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर की ओर से 22 सितम्बर को जारी किए गए आदेश के अनुसार कूचबिहार एयरपोर्ट के डायरेक्टर बीके मांडल का तबादला दरभंगा एयरपोर्ट डायरेक्टर के पद पर कर दिया गया है। उन्हें अविलम्ब योगदान करने को कहा गया है। दरभंगा एयरपोर्ट के डायरेक्टर के पद पर श्री मंडल की तैनाती से यह स्पष्ट हो गया है कि आठ नवम्बर से हवाई सेवा शुरू करने की पूरी तैयारी हो रही है। फिलहाल दरभंगा एयरपोर्ट से स्पाइसजेट की सेवा मुम्बई, दिल्ली व बंगलुरु के लिए उपलब्ध होगी। स्पाइसजेट के एमडी ने जल्द ही अन्य शहरों के लिए भी हवाई सेवा शुरू करने का आश्वासन दिया है। आठ नवम्बर को दरभंगा एयरपोर्ट से हवा...